वैश्वानर

वैश्वानर
वैश्वानर /vaiśvā-nara/ m. nom. pr. Принадлежащий всем людям — эпитет Агни; см. अग्नि




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कृतयुग, रङ्ग, उपरत, यथार्थनम्, अन्तम, निःक्षत्र, संचिति, काद्रव, विवदन, अभिषु, बाहुमूल, परिणेतर्, तित्तिरि, प्राधनिक, सयोनित्व, नभ, सत्यताति, जगद्दीप, पृथिवीपति, सर्म, अर्धचन्द्र, अवनिपति, एकचारिणी, सारफल्गु, अवस्, असंस्कार, मुक्तारुच्, पाटव, शीभम्, भूरिदावन्, सचिन्त, सोमधान, अवसादन, नह्, पारत, दक्षिणत्रा, नैमिष, भद्रमुख, हिमर्तु, सविश्रम्भ, समानता, युद्धभूमि, सभासाह, वायुमार्ग, हेलिक, धर्मबुद्धि, निपतय्, मन्निमित्तम्, शुन्धन, अभिपूज्, वर्तनि, प्रियदर्शन, निर्दुःख, वारयोषित्, महामनस्, द्योतक, वृति, प्राज्ञमानिन्, शुष्कता, त्रपीयंस्, पति, गुणमय, राजसेविन्, कुलीर, वीरप्रसविनी, ह्वार, विसदृश, शतजित्, दक्षिणायन, बृहत्कीर्कि, क्षयण, गोनसा, नियोगिन्, वात्या, राशी कर्, वेदानुवचन, धारासंपात, स्तीम, अवितथ, धूमक, विदारिन्, हविर्भुज्, गुणच्छेद, अपमृग, उद्रिक्त, साकेत, नोत्, समवली, सश्रीकता, इद्, याशु, अतिद्रु, अभिक्रम, समर्य, माल, समशस्, कर्णवेष्ट, सत्यंकार, निषेवा, सोद्वेग, संविधि, आचक्ष्, कौशल, मरकत, भारवन्त्, विहा, °लोमक, दन्तच्छद, °ह, सदृशविनिमय, शक्रधनुस्, भीति, तनु, अजुष्ट, दित्सा, प्रतापिन्, विरोग, अमवन्त्, विमनस्, यज्, उद्गर्, कूर्चक, सान्वय, विभाष्, प्रेष्या, तावत्कृत्वस्, दुष्करकर्मकारिन्, पराधीन, शिलवृत्ति, बिन्दुक, धकार, यथास्थान, शशिन्, परिभूति, हिताहित, आस्तर, पूर्वरङ्ग, मुक्ति, त्रियामा, शङ्ख, ह्रादिनी, अभिताप, कदा, वृन्दीयंस्, उपानह्, दुर्विद्य, मृदू भू, द्वारवती, आशा, बाल, सुत्रात्र, विश्वव्यचस्, सृम्भ्, आसन, हैम, सर्वहुत, मानार्ह, परिमन्यु, दुर्मनस्कत्व, आकूत, संतरण, समुपह्वा, उपकर्तर्, अपसिध्, महातल, विलुम्पक, पातिव्रत्य, ईवन्त्, वेपथुभृत्, उन्मत्त, निचुलित, निर्ह्राद, राजासन, सौशील्य, मोघी भू, ओपश, गर्व, प्राशित, सोत्सुक, वग्वनु, तीर्ण, उत्तरात्, शिवभक्त, परिखण्डन, दारसंग्रह, विन्ध्य, विगम्, निरारम्भ, यूष, जन-राज्, निर्व्यूढि, नेदीयस्, ज्ञातिमन्त्, तेजनी, हुलुहुलु, मातामही, पद्र, प्रतिलभ्, निकाम, निर्घोष, श्लेष्मन्, ब्रह्माहुति, मन्दभाज्, अनुकम्पनीय, सर्वपति, झर्झरी, गर
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