ज्रि

ज्रि
ज्रि II /jri/ (P. pr. /jrayati/ — I, /jriṇāti/—IX, /jrāyayati/ — X) становиться старым, стареть




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आलिङ्गन, खनितर्, लाट, तनूत्यज्, शश्, प्राकाश, सरोग, पण्य, प्रासादाग्र, नितोद, विशेषिन्, अनडुही, ब्रह्मभाव, मल्व, व्याध, रेष्, अतिग, प्रछन्न, यक्षग्रह, पुल्कस, लक्ष्मी, कृष्णत्व, तमोभूत, सप्ताङ्ग, उपोदासर्प्, अन्तःस्थ, निर्वचन, मुचुकुन्द, अस्मृति, समाप्ति, न्यञ्च्, बन्दी, वहनभङ्ग, निष्क्री, पाणिपात्र, तनुभाव, संधान, हस्ताभरण, विज्ञातर्, साधनक्षम, संभज्, तडिन्माला, सप्तर्षि, आबन्ध्, वाधूय, भृतबल, प्रहार, नुद्, अनूक, प्रतिहतधी, क्षेपणी, कम्बल, अवाप्ति, जाम्बूनद, अन्तर्धि, अत्र, उपाव्, समुदाचार, अमरावती, समापन, मन्दभाज्, सीरवाह, संदिग्धबुद्धि, विशूल, प्रयाच्, क्रोधिन्, व्यूह्, प्राजापत, भासस्, मुखगत, प्रजायिनी, विस्मरण, , अपहा, सहस्रदा, महाकुल, दालिक, दंसन, शाव, रसलेह, वव्र, मेघकाल, शौव, विस्फुल्, काटव, वराहु, ऊढा, प्रधि, अपयशस्, समाभर्, पयस्विनी, चित्रश्रवस्तम, विनिन्द्, चर्मण्य, जूति, शाकल, संमर्द, विस्फूर्ज्, रेजन, औदात्त्य, सुखावह, विस्फुर्, कृताञ्जलि, दक्षिणा, शरन्मेघ, पर्युपस्था, सत्त्वस्थ, प्रत्ययधातु, आविष्कार, परकार्य, तिग्मजम्भ, ह्रेपण, अजमायु, शतवन्त्, सोमप्रभ, मञ्जरी, वदान्य, आपण, अदोष, निरपेक्ष, अपिधाव्, कालक्षेप, इषुमन्त्, पराङ्मुख, अहस्त, जिगमिषु, दुःशील, दुर्, मनोगत, वत, धैर्य, स्तेयिन्, दुर्हार्द्, दुर्जल, वालधि, बिन्दुकित, प्रागवस्या, विस्फुट्, परिहर्, पानीयवर्ष, स्वस्रीय, निष्कूज, दिश्, सितांशु, अबद्ध, सकण्टक, भ्रातृव्य, स्नायुबन्ध, अत्तर्, अभिनिविश्, संवत्सम्, तथागुण, विच्युति, परिहार, हरिदिश्, विषवन्त्, भौत, बहु, मञ्जूषा, वङ्क, श्रेयंस्, त्रपा, °प्रवेदिन्, बन्दीकृत, विशस्त्र, औद्वाहिक, सतोमहन्त्, नृदेव, पेय, रक्तमोक्ष, सूचना, मयूरपत्त्रिन्, विशोषिन्, प्रतिजीवित, परिदाह, अन्तक, फलिन्, आस्तीक, अनभिलुलित, आरोहण, शीलतस्, वेन्, विश्वधेन, गोषाति, परिभ्रम्, संरक्त, ध्वृ, संभूय, विरोपण, विपक्ष, षाडविक, दूत्या, पुरा, प्रियतरत्व, प्रवातेजा, परीसार, प्रवपण, गभीर, जागृवि, वेश्य, ओज्मन्, ब्रह्मा, गोमय, नयविद्, प्रियक, क्षाल, अवछद्
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