शङ्कराचार्य

शङ्कराचार्य
शङ्कराचार्य /śan_karācārya/ m. nom. pr. известный философ веданты VIII—IХвв.




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वेण, साम, पिष्, अविद्य, तुल्याभिजन, प्रमा, ऋक्ष, कर्पूर, हेमगर्भ, मर्द्, निष्कुलीन, अपदेश, अन्, प्रष्ठ, कायिक, अबला, ग्रन्थ, आज्ञाकर, उदन्, अरिप्र, प्रथम, मसीन, भ्रुकुटि, वृषत्व, परिवर्त्, अभिप्रक्षल्, विनिद्रता, पौण्डरीक, दुर्विभाव्य, भरद्वाज, तनु, आरण्य, त्वादृश्, उत्पत्, पूर्वकाल, महाकल्प, चलत्व, संभृति, शलातुर, श्रम्, अन्तकरण, संयाच्, औपयिक, आहार, दक्षपितर्, सजित्वन्, निपात, अवट, श्मश्रुण, पद्मयोनि, लौल्य, वैशारद, प्रसन्नजल, वासवाशा, वसाहोम, बर्हिष्य, संपन्न, यन्त्रय, कन्धर, पुष्टि, संख्याङ्कबिण्दु, संविद्, उदारचरित, मौनिन्, प्रेक्षक, निर्यापण, एकिका, अतिपत्, निषङ्ग, निर्भज्, पुरोग, मृजा, गञ्ज, औशिर, प्रतिवर्ण, विभक्ति, अवचक्ष्, अर्थसंचय, त्रिपथ, वस्त्रवन्त्, महानुभाव, प्रिय, लोमन्, परावर, श्रवाय्य, दृष्तपूर्व, पुरुषता, देशभाषा, नाथिन्, विषुवन्त्, तीक्ष्णदंष्ट्र, शुक्लदन्त्, प्रबाधक, अतिलुब्ध, द्रोह, मधुकृत्, अध्यवसाय, विज्ञा, बलप्रद, रभस्वन्त्, बन्धन, उपचित, वोढर्, मेषिका, दिनकर, क्रीड, शरवण, रध्, दीनास्य, स्वयुक्ति, नाष्टिक, विषमय, गुल्फ, परोपकरण, सूचि, निर्ऋथ, बभ्रू, पुण्य, वडवाग्नि, प्रजीवन, रणभूमि, अबोध-पूर्वम्, उद्वस्, यौन, क्रीतक, मनुस्मृति, कार, उग्र-प्रभाव, अमृक्त, अन्यूनार्थवादिन्, अपसद, विगम, संवृज्, तुषारकण, सर्वाभाव, भाजयु, तार्किक, च्युति, उन्मी, कृच्छ्रता, ससंभ्रम, आविग्न, विघट्ट्, जिगीषा, मृत्युबन्धु, धरित्री, देवपान, अवाप्, नगरौकस्, आपान, प्रत्याया, गोहन्तर्, शठत्व, डयन, विचेष्टा, सुषुप्त, गुञ्जा, शरासन, दयालुता, बन्धुल, ऐश, खर्द्, षड्रात्र, भ्रात्र्य, शोकपात्रात्मन्, चपेट, फल, कृतवसति, दण्डयात्रा, अनुपालिन्, प्रस्वन, पालक, बर्ह, वावाता, अतिप्रबलिन्, मन्दोदरी, काहल, शक्वर, प्रणी, द्रवण, पितृष्वसर्, वल्ल, आनृण्यता, पायु, अस्वस्थता, विचित्रवीर्य, यजन, नैमिषारण्य, कटि, साक्षेप, प्रतारक, टङ्क्, प्रदिह्, उपसाधय्, सज्जता, स्येदु, न्यञ्ज्, आमाद्, दुःशासन, दारुण, सप्तर्षि, दुर्गापूजा, सराति, विजिह्व, हुतभोजन, विश्वनाथ, तावन्मात्र
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