संवर्णन

संवर्णन
संवर्णन /saṁvarṇana/ n.
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2) рассказ




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चन्दन, जानु, आगन्तुक, उपशी, संक्षोभ, पक्षिन्, प्रमणस्, विलज्ज्, स्वःस्त्री, नीप्य, आयुःशेष, सधस्त्ह, धात्री, आप्तवर्ग, नस्या, गृध्रपति, जीवलोक, त्व, संमील्, प्रात्यक्षिक, विशिरस्, शीतकर, विदर्शित, शस्त, प्रसूति, राजभट, कण्ठभूषण, सप्रहासम्, वा, प्रतिरोधक, लिन्दु, धन्वायन, मधुकर, सिद्धिज्ञान, सर्ववर्ण, अवसद्, उद्वम्, तमोहन्, प्रकल्पय्, ऊर्नम्रदस्, गौड, प्रवर्तय, मादयिष्णु, एकाङ्ग, चेतन, आराविन्, उपकार, ब्राह्म्य, कर्करि, भिषज्या, संभ्रान्ति, दंशुक, द्रढिष्ठ, क्षल्, बहिष्टात्, लुण्ठन, प्रक्षालक, दीक्षणीय, सहमूल, अनमीव, भ्रुकुटिमुख, प्राणधारण, शतशाख, सत्त्रिन्, विवर्जित, पुष्पामोद, वाग्यमन, माहिन, विवल्, प्रभिन्न, मालिन्य, महिन्, निर्भा, युष्माक, भारवन्त्, संभावन, कशा, यन्त्रणा, वीचि, जागृवि, घृणालु, पुनःपाक, शात, अभिहर्य्, पिञ्जरिक, तपस्या, मेदिनीश, अर्हय्, सशङ्क, तट, सुबन्धु, भिन्नगति, काङ्क्षा, अभिसिच्, पुष्पपुर, विपाप्मन्, शक्तिमन्त्, प्रतीमान, सायुज्यता, सुशीत, विश्वभेषज, मन्थ, सोमपान, वर्णता, विष्टर, भूषण, वस्तु, वर्धकि, वित्रासन, ब्रह्मवनि, वर्मन्, निम्ब, विनेत्र, निर्जिह्व, , चक्रि, विलोभय्, रेखा, तुन्दिल, संज्वलन, काण्डीर, जगत्पति, तात्पर्य, ब्रह्मकार, आख्या, मृक्ष, चित्रन्यस्त, इति, विनिवारण, प्रतिमङ्गलवार, नटन, अधेनु, दुर्जन, बलदा, ऐलब, नवविंशति, सुम्न, संपीड्, छन्द्, निर्याच्, अभिख्यापय्, शब्दिन्, अपिहित, जन्मस्थान, विरुज, रौक्ष्य, भिक्षावृत्ति, कोक, वह्निशिखा, नर्कुटक, निकृत्या, उपयु, वित्तवन्त्, नीर, प्रतिभी, दिक्पथ, वरिवोद, उपयाचित, सशिरस्, किलास, द्विर्वचन, आकर्ष, श्वोवसीयस, धैनुक, उत्पक्ष्मन्, नमस्य, आस्कन्द, विकाशिन्, विभूषय्, भूतल, शासितर्, एकजात, ऋजीक, घ्र्षु, समाधिमन्त्, निःसत्य, जयन्त, रक्ष, देवता, सुग्रीव, सकष्टम्, संभोग, विक्रोष्टर्, अयन, हिमगिरि, प्रवातेजा, कुलस्त्री, सुखप्रसव, नामकर्मन्, शुष्ककाष्ठ, असत्त्व, संयम्, कफ, असित, वार्द्धुषी, तुषधान्य, नौयान, असंवीत, सदृश्, प्रातरित्वन्त्, अमुया, भर्तृमती, मांसविक्रेतर्, पनाय्य, अरसिक, अनुयुजय्, सुयशस्
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