रथविद्या

रथविद्या
रथविद्या /ratha-vidyā/ f. см. रथविज्ञान




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देवसद्मन्, मोक्ष, पावर, परिपूरक, चित्रवन्त्, ग्रामणी, प्रतिदान, निष्ककण्ठ, साक्षात्कृति, क्रीडनक, निवापक, अनन्य, सुविधि, अन्यतर, किरीट, संपीडा, प्रसूमन्त्, ऊर्णनाभ, दूरसूर्य, दभीति, निःसह, संमीलन, सापेक्ष, समनुज्ञा, जग्ध्वा, ब्रह्मसावर्णि, प्रार्पण, निबुध्, सहस्रचक्षुस्, उत्पात, सुदुःखित, ऐकाहिक, वरारोह, अवलग्न, परिभव, विप्रथ्, गृहपति, विद्योत, आर्षभ, आमथ्, देवत्रा, वातरंहस्, प्रतिज्ञान, लिपिकर, अभ्यर्हणीय, दुष्टि, त्रयश्चत्वारिंशत्, सत्यवदन, चिरकार, मूढमति, वनिन्, दासीत्व, पृथुल, दारुमय, गजपुंगव, नाक, पिशुनवचन, अभ्युपपद्, प्राणहारिक, मम, निरवलम्ब, राजकृत्य, वित्तप, महारथ्या, प्रतिबन्धक, प्रलाप, सूक्ष्मपाद, शातकुम्भमय, तिमिर, महाढ्य, मौहूर्तिक, कात्यायनीय, दुघ, उद्गता, महौषध, मध्यमजात, ह्रस्वक, शिरःकम्प, दशवर्ष, आरक्षा, शूर्प्, निधीश्वर, संश्रु, सरसी, एतद्, संज्वलन, सागरान्त, धूपन, योजक, मन्त्रज्ञ, संताप, हिताहित, नीषह्, खण्ड, विशोधन, गिरिपृष्ठ, हिम्य, गिरिपति, आश्रित, प्रियचिकीर्षु, प्रागल्भ्य, संरब्ध, सस्मित, हिमकर, गु, स्त्रीवश, कृतध्वज्, उदीर्य, पोत्रिन्, श्रव, धिक्कृत, विश्वावसु, संपादक, आपूर, बर्ह्, संव्यान, राजपथ, बुध, दास्वन्त्, वंशभृत्, एकाग्र, पर्यन्त, माद्री, वर्तक, मनोहर, अभिपद्, भिक्षण, श्यावदन्त्, भक्ति, कौष्ठ, किरण, विवृत्ताङ्ग, परहित, विशिख, महत्°, शराव, इन्द्रवन्त्, फल्, संवसु, व्यतिक्रम्, परुषवादिन्, समर्धन, ला, आसेचन, दुर्मनस्, कृष्टि, दोहस्, प्रुषितप्सु, संस्थापन, द्रविण, ऐश्वर्य, ह्लाद्, °संहारिन्, स्तोम्य, भट्टारकवार, वधर्यन्ती, अजातशत्रु, एनस्, यह्वन्त्, विशिष्, ऊर्जा, व्योमगामिन्, निमित्त, सर्वौषधि, छालिक्य, वनश्वन्, दैवज्ञ, सीमन्तिनी, दीर्घराव, देवजूत, सपित्व, लोभ, लब्धि, निर्जेतर्, गिरिप्रस्थ, अकुर्वन्त्, सुवर्ण, ब्रह्मदान, दशतय, नित्ययौवना, शस्त्रन्यास, सरेतस्, रसवन्त्, पृक्ष, आख्या, सश्रद्ध, समुपक्रम्, तद्विद्, अकारण, क्षयिष्णु, अनुचित, उत्तमजन, निभालन, संफुल्ल, स्पर्धिन्, लीला, सुगीत, शाकुनिक, ईति, माला, नमस्कृति, विष्ठा, मासिक, निर्ग, नक्तमुखा, सुरपुर, अध्यूह्




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