क्षेत्रप

क्षेत्रप
क्षेत्रप /kṣetra-pa/ m. хранитель полей (о божестве)




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प्रमुह्, परीत्त, निरुपाख्य, गजेन्द्र, पवित्रवन्त्, उभय, पट्, दुर्गत, , हीरक, तपश्चर्या, प्रसारित, सप्तवार्षिक, दैवत, पुरीष, तिलतैल, मदिरा, प्रवार्य, रोमक, उपवेद, तुर्या, जगतीतल, सूरि, खर्व्, तत्रत्य, एकषष्टि, स्थगन, अयस्कान्त, भक्तिमन्त्, विक्रयिन्, अस्, द्वादशविध, षट्शस्, उत्खातिन्, सूचि, संवर्, धृति, समुत्सर्ग, स्म, वितानवन्त्, सनि, तन्, दुष्कृत्, विनिर्मा, संवत्सरसहस्र, आतिथ्य, उन्नत, कपिला, युष्मान्, मन्द्रजिह्व, प्रवद्, वैरूप्य, चतुरुत्तर, वेददर्शिन्, गाहन, अयुत, झरी, कट, हवस्, पुण्यता, वर्णज, निकृति, परिमर्श, परिकल्, दैत्येन्द्र, अभिवीज्, सश्रीकत्व, दान्त, निरवशेष, त्रिपुरान्तक, ऊर्णा, प्रतर्क, भ्री, दूषक, अधःशय, नरव्याघ्र, कङ्केल्लि, अभिघात, रेखान्यास, धातुपाठ, अष्टरसाश्रय, आता, स्वेद, इषुध्यु, कील्, संवर्ग, भर्ग, नित्ययौवना, शुद्धि, श्वश्रूस्नुषा, पुञ्ज, असमस्त, श्लेष्मण, एकैश्वर्य, गञ्जन, पातर्, नैष्किंचन्य, विद्वेषण, प्रशम्, चर्षणि, वेश्मन्, एनस्वन्त्, अक्त्वा, °बन्धिन्, टीका, शार्ङ्गपाणि, छद्, महीयु, देवलोक, प्रव्राजिका, प्रवन्, निःसुख, दुर्गाचार्य, अवाप्ति, श्येताक्ष, खञ्जन, जयद्रथ, विभूति, द्वित, विश्वतूर्ति, विभु, श्रत्रिय, श्वप, कार्यकारण, मयूख, उत्पतन, ऐशानी, विशस्तर्, औरस, निःसंशय, नीरुच, रेखा, मारीय, शुभावह, , सेदि, कुशल, तनूबल, विनायक, दक्षुस्, मुख्यसदृश, जात, पूषण, धायस्, भालपट्ट, क्षैत, उद्घोष, अपव्यध्, दशिन्, तवस्तम, प्रघोष, सचित्त, मनुजाधिपति, तद्भागिन्, घण्टापथ, वञ्चक, पवित्रत्व, वेदितव्य, इष्, मेथि, दुरत्यय, अनुविली, तुविष्मन्त्, प्रतिरुच्, °मुच्, उपचर्या, क्षोभ, परीवाह, अधिदैवत, जगतीभर्तर्, एनान्, विप्रकार, काठकोपनिषद्, उच्छिष्, विमद, एव, अभिपित्व, पृथुजघन, मृदुहृदय, प्रीतिवचस्, अर, महागल, निरुपाय, व्रीडित, पक्वान्न, धीर, इष्टव्रत, हयद्व्षिअन्त्, प्रवपण, हविष्कृत्, रेक्णस्वन्त्, उत्पतय्, अतिसंनिधान, विभक्तर्, अत्तर्, एकधा, दीनमनस्, प्रणश्, तोयधार, दोधत्, द्युक्ष, संपश्, बभ्रि, दृष्टिविक्षेप, सुश्लक्ष्ण, दुर्धरीतु, महाप्रभ




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