वर्जयितर्

वर्जयितर्
वर्जयितर् /varjayitar/ m. тот, кто уклоняется, избегает чего-л.




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त्य, आत्मसंभवा, भारत, जलवन्त्, न्याद, नभ, विसंवाद, अभियाच्, उच्, भुवनतल, प्रियंकर, सप्तहन्, युग्य, द्विध, चर्मकारिन्, अरन्यवासिन्, मोमुघ, जगद्धात्री, पिच्छल, संकोच, बहुव्रीहि, अवमर्ज्, रयिवन्त्, अपलप्, प्रातराश, पराह्ण, मङ्गलशब्द, चैत्ररथ, द्विपदीखण्ड, प्रध्या, नर्मोक्ति, अभिसद्, संशास्, ज्ञानवन्त्, दौहित्र, उपरमत्व, प्रतिनिर्यत्, विश्वास, महिलारोप्य, संपादय्, बुस, कार्श्य, आत्मनाद्वितीय, जयिन्, क्षौर, मुग्धाक्षी, मुग्धबोध, सारवन्त्, हिरण्यस्रज्, पार्श्वतस्, क्रान्ति, हिरण्यविमित, महिमन्त्, क्लेश, शृङ्गक, पयोमुच्, वटक, शितिरत्न, निर्माण, विवेकज्ञ, शम्या, पारिहार्य, चित्ररथ, प्रतिवेदय्, तार्तीय, हवनस्यद्, झौलिक, खेदा, संसिव्, पीन, रुज्, वार्षिक, उद्दिश्य, जरण्यु, विमार्ग, सदोष, वल्ली, प्रच्छद्, शिप्रवन्त्, उशी, शङ्कुमुख, लोकवृत्तान्त, प्रतिबल, व्याकुल, असुख, वेदनीय, अयस्कान्त, स्थानिन्, कुलाल, मीलन, प्रतिसंहार, विप्रस्थित, प्रजेश, द्वितीयभाग, वैशंपायण, गरल, °संश्रयिन्, लिप्, मद्य, कृष्णवर्ण, विट, विसंज्ञ, दब्ध, प्रकल्प्, मुग्धेक्षण, °वादिक, संपातिन्, मयो°, विलुण्ठन, जलहारी, सौप्तिक, चर, सुभट, निः-शरण, शून, शीतभानु, अर्धभक्षित, रिपु, गणेश, भङ्क्तर्, द्विविधा, क्ष्विद्, दीर्घराव, काय, उपशम, युद्धशालिन्, श्वप, प्रतराम्, विमुच, सहन, संहरण, लक्षणवन्त्, वेदवन्त्, आबुत्त, वशतस्, प्रणिधान, यक्षिन्, रोगहर, अन्वञ्ज्, प्रतिमन्त्रण, दाय, दुरधिगम, स्थविर, प्रष्टव्य, बुध्न्य, विपत्ति, न्युष्, नेम, सालक, योषणा, समुद्ररशन, दूर, पुत्रकृथ, प्रच्छादक, विवदिषु, हरदग्धमूर्ति, क्लोश, चर्चन, परिरक्ष्, पार्श्वास्थि, दब्ध्वा, वशत्व, देवाय, वेसर, नाभाग, शाप, यजस्, प्रवत्वन्त्, प्रदा, आसुति, °देवत्य, सौर, अत्याश्चर्य, लुण्डी कर्, दुरवाप, दुर्गसिंह, पृथुशिरस्, मेद्य, अदामन्, भागशस्, विषवन्त्, संजीव, शार्वरी, अनुपक्रम्य, किरीटिन्, प्रामञ्जनि, अपद, वास्तु, आत्मन्, वलीमुख, श्वित्रिन्, श्रीद, आदि, द्वारपक्ष, सनीड, चित्तानुवृत्ति, प्रमद्, अकिंचन, नर्तना, धूपय, समुच्छ्रय, पीवोरूप, पौरंदर, रहस्, ताम्रधूम्र, संनर्त्, पौरलोक




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