परिवर्ध्

परिवर्ध्
परिवर्ध् /parivardh/ (формы см. वर्ध् )
1) подрастать
2) становиться сильнее




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स्वभूमि, प्रतिपण, लघुहस्तला, धार्य, ऋग्मिय, काटव, बाह्य, संशोषण, उपसिच्, लगुडहस्त, नृपीति, सागरशुक्ति, त्वाष्ट्र, रूक्षभाव, सदागति, वनैकदेश, ताजत्, लम्बन, शशिप्रभ, आतपत्र, निरय, कलुषमति, गिर्, असाधक, अपहति, श्वेतपक्ष, स्यम्, आदर्श, उत्साहयोग, उन्मथ्, दण्डदास, देवया, दुरक्ष, अधःशय्या, नीप्य, रुजावन्त्, क्षयिता, सायुध, सेर्ष्य, दुर्वचस्, क्षीब, अबुद्धिमन्त्, असहन्त्, व्राज, दूतत्व, निरपेक्षित, वासतेय, देवयज्या, करङ्क, पाचक, वार्, ऊर्ध्वमुख, निरवद्य, अर्थितव्य, द्वित्व, उभ्, सस्नेह, शुभाशिस्, गोशृङ्ग, धूमोर्णा, , पैत्त, वाक्पथ, स्त्रीधन, आनीत, पादनम्र, अलंकृति, सानु, गुण्ठन, विभाग, गेह्य, पूर्वत्व, अपभर्, मन्थ, अवचन, महीभृत्, सप्तच्छद, दुर्वाच्य, द्वेष्यत्व, वाट्य, परिशुच्, अङ्कुर, लज्जा, पिष्टप, प्राभवत्य, राजकृत्य, पिण्डरक, -कृत्, निष्पुरुष, धनेश, महि, नखाशिन्, अद्यतन, सुगम, हिन्व, शीतलता, धनुष्काण्ड, ह्वान, तान, धर्मपर, रज्, ऊम, त्रात्र, बलात्कार, तन्त्रकार, प्रौढ, चण्डाल, वेदिन्, षण्मासी, आध्यात्मिक, उष्णीष, स्तिया, वेदस्, वृक्षशाखा, देवयात्रा, गभीर, शशधर, निरावर्ष, सभेय, कालहरण, पृषत, विलय, भट्टिकाव्य, अमर, शमन, स्तोम्य, एकशत, धूलिध्वज, शिप्रवन्त्, हंसकालीतनय, धानुष्क, निवर्तिन्, उद्रिक्त, मुक्तामणि, प्रमर्ष्, छुरिका, प्रदर्शय्, बन्ध्, प्रपञ्चन, निर्यातन, अदेशकाल, वर्तनार्थिन्, सवर्ण, अपण्डित, भेषज्य, यज्ञशेष, सुत्रात, तरुगहन, तिग्मांशु, निवारण, स्थेयम्स्, सम्°, यातयाम, पृतनाषह्, प्रणीत, नरेन्द्र, विजिति, भुरण्यु, जनयितर्, जगतीपल, अदय, हेमक, सोमधान, पादान्त, उद्रिन्, सर्वज्ञ, दूरत्व, केश, नगरिन्, स्वाहा, अपलप्, दोषल, व्रणिन्, मुद्राराक्षस, अभिक्रुध्, ऐन्द्रिय, अधर्म, उपकृति, मर्द, क्षुर, प्रसङ्गतस्, अपरोक्षत्व, न्यस्, विच्छाय, हीनांशु, छलिक, विचेष्टित, शक्वन्, श्रौत्र, रूपायुधभृत्, वैराज्य, व्रतपा, धातु-कोश, स्फटिकमय, समरेख, पनाय्य, परहित, प्रतिरक्ष्, किमर्थ, विवर्तन, रन्त्य, द्विपिचर्मन्, दिशा, अभ्यञ्ज्, गौरव, आख्या, वैमुख्य
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