काव्यशास्त्र

काव्यशास्त्र
काव्यशास्त्र /kāvya-śāstra/ n.
1) поэтика
2) назв. краткого трактата по поэтике




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सौक्ष्म्य, अनुशुच्, लवणोद, विपक्ष, इडावन्त्, पॄ, संबाध्, सौविदल्ल, कदर्थना, शस्त, नियाम, विपुलता, अकाण्ड, राजश्री, चिताधूम, मर्मविद्, मनोज्ञ, धर्मरूचि, समन्ततस्, बृहत्पलाश, कर्त, कृतकर्तव्य, सुखिता, दारक्रिया, चोदन, उशी, घोरदर्शन, प्रतिपण्य, विखेद, वाक्य, व्यजन, ज्योतिर्विद्, त्रस्नु, दुराप, भाजयु, तोकवन्त्, , उत्तरण, नविन्, अमरराज, सिञ्ज्, शौर्य-कर्मन्, समुद्रवासिन्, क्षा, तनूपा, जलाष, शिखरिनी, ज्ञीप्सा, जानकीवल्लभ, अप्रीति, दीनता, पूतभ्+ऋत्, मत्कुण, प्रतिप्रवच्, भङ्गी, सुतपेय, क्षीव, घर्माम्बु, वनौकस्, निकर्त्, पौरोगव, प्रतिफलन, कुलतन्तु, साध, अविषादिन्, लोडन, प्रपद्, सुकेशन्त, वर्चस्विन्, अद्यतनी, सातत्य, क्रुश्, उल्लम्बित, वृज, सचकितम्, अभिली, अभ्यवहर्, परपक्ष, शुभ्, लुञ्चन, लगुडहस्त, आज्ञप्ति, उत्कट, अनेकशस्, मितद्रु, संशुष्क, शारदीन, नीरज, शीतमय, विप्रनश्, चूडा, प्रीतात्मन्, सुवृत्, परिवेषन, उत्प्लु, टीका, नववार्षिक, उद्वप्, वेतसवृत्ति, परिमर्, नैदाघिक, अभिसार, वप्सस्, विद्विष्, लवणाब्धि, दिवानक्तम्, भुज्, पैष्ट, वनज, सिंहनाद, केशिन्, प्रणाली, अशुचिभाव, पुण्यता, विराध्, चरित, दुर्लङ्घन, विकम्पिन्, सिध्, द्वाररक्षिन्, प्रतिघातिन्, समस्थ, चिरि, गृहाश्रम, गर्भत्व, पण्, आभाष्, उन्नद्, विहाय, पथिन्, विलोकन, अद्रोघ, अपहर्, आति, नर्तयितर्, हयग्रीव, प्रवात, इन्दु, निरमित्र, अभिचक्ष्, , पौर्विक, व्रा, ॠकार, वर्णज्यायंस्, दर्शपूर्ण-मास, विनिर्गम्, श्मश्रुकर्मन्, समुन्नति, अधिप, तोक्म, प्रतिसंधा, उत्तप्, स्वनय्, प्रियैषिन्, संमेघ, इर्य, याच्ञ्य, पुनर्लेखन, प्रार्थक, दुर्मन्तु, द्विवचन, °नौक, विग्रह, वाच्य, अनाश्रित, पृथिवीदण्डपाल, अतिपठ्, सापेक्षत्व, योगिनी, त्वग्दोषिन्, सम्यञ्च्, मह, रत्नधेय, सुबाल, साव, प्रमातर, लक्ष्मण, सूर्यबिम्ब, विराज्, कूट, इदा, अभिधम्, पूर्णत्व, सामग्र्य, भ्रान्ति, सीमावाद, प्रहरण, अजप, पञ्चदशाह, पदान्त, सग्रह, कच्छ-प, संकल्प, स्वपराह्णे, रसन, सविक्रम, निष्कास, समर्य, नभोरूप, चुच्चू, पूर्वराग, सार्थपाल, हुताश, प्रवर्, अवसेक, प्ररुध्
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