वनान्त

वनान्त
वनान्त /vanānta/ (/vana + anta/) m. край леса; опушка леса




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मूढत्व, दुर्हणायु, निर्गा, पारत्रिक, स्वयंवर, स्वायुध, अजप, धर्मोपदेश, त्रैमासिक, आसञ्ज्, देवन, चक्रव्यूह, अनुविराज्, किण्व, प्रताम्र, चमू, अग्रकर, तिरस्करण, लाभ, समुल्लस्, उत्कर्ष्, सहस्रधार, पराशर, तुल्याभिजन, अन्वालभ्, भौर्ज, रसवन्त्, सूचिपत्त्र, उच्छ्रि, प्रदोष, पूर्ववत्, अकुल, श्मश्रुधारिन्, अर्णव, निर्वाहय्, बलयुक्त, पेडा, अव्ययीभाव, सर्वजित्, दुर्धरीतु, ग्रैष्म, शृङ्गक, शरीरकृत्, परपुरुष, नवमल्लिका, पांसुक्रीडन, गार्ह्य, दुर्योण, निषेवित, प्राश्, निगृहीति, समांशक, निर्वेदवन्त्, मरक, समवसर्, ज्ञा, वनग्रहाहिन्, पृथक्क्षेत्र, अवलोक, स्पृह्, शङ्कृत्, प्राज्य, सटाल, बर्ह्, शालापति, पर्यक्, अहि, आपद्, प्रतिकर, पुरोगव, चकोराक्षी, विक्षर, असंवीत, शिशुमन्त्, दुर्जनाय, ब्रह्मसावर्णि, प्रवर्तक, पञ्चपञ्चाशत्, हरिचन्दन, शशिप्रभ, पातंग, क्रोश, रात्रिशेष, सांयुग-कु, तिन्तिड, पणितर्, विचक्र, काक, अवष्टम्भ, निरम्, दिगधिप, वैमात्र, नस्, जीवनी, अकृतसंकल्प, बहुदान, अयोग्य, अङ्गिन्, प्रतिबोध, अनुल्बण, स्वर्ग, नामकीर्तन, बुद्धमार्ग, निवस्, अभिकम्प्, दिवसनथ, पदादि, वेदवन्त्, आयशरीर, सोदरी, उपानी, महन्त्, निष्पद, वीर्य, परिमल, सर्वज्ञ, मिश्रधान्य, गोपुर, परितर्कण, तथाभूत, वक्रोक्ति, तृपल, केवट, स्नायिन्, ख्या, निभा, आर्यता, रूपभृत्, अभिशुभ्, भर्गस्वन्त्, षष्ठांश, फेनप, ह्रास, सपत्नसाह, प्रतिबन्ध, विक्लव, शिम्बि, पुरस्तात्त्न, मृगव्याध, सप्तद्वीप, वित्ति, इरस्या, उत्पू, सर्वसत्य, नियोग, पौण्ड्र, घर्मवारि, अखर्व, विमुख, ईक्षा, एकचर, अविष, युग्यवाह, वेणी, मीनकेतु, सव्यापार, अनिमित्त, पद्, खल्व, सश्रीक, मा, रजतभाजन, अचित्त, अर्थान्तर, सुचक्र, रणक्षिति, अनाख्यात, स्वेदज, ज्वल, पापीय, वर्ति, द्विजन्मन्, वाग्बन्धन, प्रावालिक, विधर्, नुति, जीर्णि, अन्ततस्, मध्यमस्वर, सूत्र, अनुबुधय्, धनव्यय, शिखाभरण, ताम्रपट्ट, त्रिपिष्टप, विश्वरूप, इडा, संभार्य्, त्रिसप्त, क्षुद्रक, विशाल, वागृषभ, निवर्तन, परिणय, साधनत्व, उपस्पर्शिन्, समवृत्त, ऊर्ध्वगमनवन्त्, दिविज, प्लिहन्, वाग्यत, राजभवन, उपसेवा, पराजि, प्रतिमोक्षण, भस्मसात्, श्नप्त्र
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