शब्दापय्

शब्दापय्
शब्दापय् /śabdāpay/ (den. /śabda/)
1) вызывать; призывать
2) называть




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रूपक, रजतमय, तात्काल्य, पुष्पकाल, निस्, अमरेश्वर, दीक्षा, भन्द्, नवेदस्, इन्ध, गुणान्तराधान, देवन, हून, श्राद्धदेव, अष्टभाग, व्यादेश, क्षय, प्रातर्युज्, प्रतिश्रुत्, धर्मजीवन, अद्यश्वीना, शिवमार्ग, सांयुग, राजार्ह, पञ्चकृत्वस्, व्यापादित, काञ्चनगिरी, दुरिष्टि, समृध, पदपाठ, दुःखमोह, गोलक, अम्बरीष, निर्वास, प्रमद्वर, वाचना, रन्धि, रक्तचन्दन, फल्, हस्तिपद, निटिल, कथन, वाणशब्द, इषिर, देवकुल, निवर, उपसमाधा, सैकतिन्, चतुरुत्तर, पृश्नि, उत्पट्, भव्य, राजद्वार, ऐरावत, पारदृश्वन्, सुकुल, नरनाथ, मृगराज्, शङ्कुमुख, वन्धुर, खल्व, अगोह्य, स्थापनीय, बिलिश, तिग्मवीर्य, अवसक्त, ऋतु, क्षयित्व, हरिकेश, पुरुशुश्रूषा, सुराङ्गना, नकार, सुस्त्री, प्रमति, निगरण, नभोरेणु, उपजन्, संकोचन, सजाति, मैत्रिन्, शिथिली कर्, ताभ्याम्, , मुखचन्द्र, नियोजन, पीवर, विदेशस्थ, पत्, परिवस्, प्रणयिन्, धृष्णुत्व, सेवा, श्वेताम्बर, विलाशिन्, द्रवर, राधस्, गणित, आसेवा, वाचन, उदस्, नाभिलक्षित, प्लाव, वृत्रहन्, संवर्त, निमि, रुक्मरथ, विध्वंसिन्, मित्रभेद, लून, निपाद, प्रतिरसित, रघुवंश, विश्राम, सज्जन, भृत्यभाव, कामदत्व, चतुर्दशन्, वमन, कालीन, प्रत्यहूय, दशकुमारचरित, फेट्कार, तूतुजि, कि, संभार्य्, जीवनहेतु, रूढ, प्रत्य्पन्नमतित्व, संमह्, पृषदश्व, मनीषिका, अधिराज, ओपश, परिचरण, घृत, °विलोपिन्, किष्कु, देवपात्र, प्रत्यग्र, नल, मलिनिमन्, मृगया, परिप्लुत, द्वाचत्वारिंशत्, धोरणी, जाम्बूनद, मूलफल, अद्धाति, अवच्छेद, शास्त्रकार, सरिर, चित्रलेखा, धुरंधर, धूप, आनेतर्, नरकस्थ, पाजस्, मीढ, शारीर, सीमा, निरीहता, विश्वहा, हयवाहन, कृत्य, °कार, सागर-वासिन्, अनुअहम्, विनेत्र, विरक्ति, ऐकश्रुत्य, शववाह, आशित, घर्घरिका, दोहन, साकंवृध्, संस्था, वालि, विनिधा, , पत्त्रिका, अवध्यता, वागुरा, आधि-पत्य, शुन्धन, कुलपति, शन्त्व, शिष्ट, सुरसा, अनुग्रह, निप, भगीरथ, दायागत, ऊन, मुण्डय, निशाधीश, संरुद्ध, गुरुतल्प, वृषल, छुच्छुन्दरि, अभिवह्, आहवन, प्रसूमन्त्, मध्येसमुद्रम्, शिञ्ज्, श्रीमत्ता, नहुस्, उपगा
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