संप्रसू

संप्रसू
संप्रसू /saṁprasū/ (формы см. सू II )
1) производить
2) рождать




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स्वाहाकृत, व्यतिरेक, इच्छु, प्रतिष्ठ, निहाका, रघुया, प्रत्युद्गम्, जेन्य, गृहिणी, शर्मन्, सुयुज्, समराङ्गण, षट्पत्त्र, भ्रातृदत्त, पांशन, मरुत, संतेजय्, संकोचन, सौशील्य, विधा, कल्क, वियन्त्, त्वङ्ग्, नीलरत्न, अविनोद, किसलय, राहु, विडम्बन, रणित, द्युम्न, अगद, आयस, यात्रा, याचिष्णुता, °र, प्रतिरोध, शतकृत्वस्, निष्प्राण, अचेष्टता, बर्हिष्मन्त्, संमिल्, विकत्थ्, एकजात, प्रसादक, विच्छेदिन्, वेदस्, उत्क्रम, निधन, अनिच्छन्त्, मनोऽभिराम, अभिरुह्, वेणुक, त्रिदिवेश्वर, दक्षिणाप्रत्यञ्च्, चतुःशालक, ज्या, सूत्रकार, लिङ्गपुराण, समभिपद्, मथिन्, भोगायतन, पुरस्, धर्मिन्, सुग्रीव, पद्मसरस्, संगमन, °भु, सुखवास, आलम्भ, सुषुप्सा, षड्विंशब्रह्मण, पुस्तककर, आखण्डल, वायुपुराण, तटिनीपति, बाधिर्य, इष्टि, बुध्न्य, ष्ठीविन्, कृमि, उदि, वप्, महाचल, अधिजन्, आदिश्, राजसुता, बर्हिःष्ठ, मन्त्राधिराज, धर्मन्, परुष्य, जीवदायक, किष्किन्ध, दम्य, विषकुम्भ, स्पृहावन्त्, प्रियसंवास, सहस्रकृत्वस्, द्रव्यजात, कृतकार्य, सत्यदृश्, जीविताशा, दुष्टान्तरात्मन्, नाली, कल्य, अर्ध, अग्निमित्र, मनःसंताप, दंसस्, त्व, तुरण, स्वर्, अन्यतम, उड्डीयन, रसवती, प्रध्यान, परिमुष्, आत्मज्ञ, नारद, श्रमजल, कठिनी, अमहीयमान, विधुति, नु, मध्यमक, प्रमि, सर्वज्ञत्व, मन्थ्, नृपति, अतिगा, दिष्टान्त, अन्यून, शातह्रद, सरसिरुह, समवृत्त, विभ्राज्, प्राग्वत्, निर्घृण, माध्य, कति, परिहार्य, ऊर्म्य, परिगा, अनुप्रवद्, दीर्घप्रयज्यु, सौक्ष्म्य, सावमर्द, दिलीपसूनु, प्रतिवाच्, प्रपित्व, , दच्छद, सुकुमारता, प्रयाचन, सौष्ठव, धीवर, पीत, हविर्भुज्, सनद्रयि, अपेक्षा, वणिक्सुता, रह्, विश्वस्, परिशी, बाध्, वरक, आनकदुन्दुभि, अधिरोहय्, पाणविक, विश्वावसु, निर्गन्ध, सखित्व, व्यूह, सरस्वती, कृतक्षण, जलस्थान, अक्र, वार्योकस्, चित्रग, पृथिवीपरिपालक, सभार्य, सुनस, समीर्, प्रयत्न, सविषाद, शिशिर, समस्य, आसद्, कार्ष्णी, भस्मावशेष, भष, निर्वापण, सशर, दूष, अर्हय्, अवरोध, अजल्पन्त्, परिवेशस्, नाकवनिता, भैक्षवृत्ति, चलय्, धनद, पेशी, वाग्यत, वेन, गर्भग्रहण, दरद, राक्षसता
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