प्रणपात्

प्रणपात्
प्रणपात् /praṇapāt/ m. праправнук




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शकुनज्ञ, प्रजातन्तु, अलिकुल, शरण, प्रत्यागमन, सहायता, विमद, समुत्सुक, आन्ध्र, आराधयितर्, संवत्सम्, समीपतस्, प्रियसंवास, घोष, पाक-दूर्वा, रहोगत, उद्योग, नीरुज्, जाबालि, पाशिक, कुधी, वप, वनितर्, तैमिररोग, विनिवारण, निर्मोचन, शिलावेश्मन्, संविधि, संस्कृति, पोत, स्थूलप्रपञ्च, वसुता, परु, स्वस्तिक, गीति, प्रशम्, नर्तू, दुरालम्भ, शाशक, वायुर, निष्क्रयण, सदस्य, प्ररुद्, अभ्युत्था, सदुःख, नर्मदा, भास्, तीर्ण, विवेक, वादित्र, श्रोत्रपरंपरा, पुरुषमेध, श्वठ्, दर्पणिक, निशरण, निंस्, प्रवल्ग्, °विद्, संवरण, फेनिल, विद्वल, सुहित, मुद्रित, दार्श, वलन, जुष्टि, दिग्वासस्, प्रत्यासद्, तृतीयदिवस, अदेवता, क्षम, उदीचीन, अधःशय्या, स्वाध्यायवन्त्, सौगन्ध्य, निरुष्मन्, विशसितर्, चारुदेष्ण, श्वेतभानु, पक्षिराज्, निः, पृष्ठ्य, वंशकर, क्षयिष्णु, एता, सखि, ऋतज्ञा, रोह, गर्हा, अम्ल, प्रातरित्वन्त्, अर्वन्, बैल, वादयुद्ध, द्यावाभूमि, महागद, वच्, संब्, युष्मान्, ऊर्णनाभ, सदागति, अतिलङ्घ्, राधेय, वैसादृश्य, फलग्रहि, प्रचल्, दीनता, द्वार, उपाध्याय, सुज्ञान, शोकपात्रात्मन्, पेशन, सकस्रगुणित, कण्ठग्रह, समुपया, स्वर्ग, ह्नु, अतिया, तनु, °वासिन्, अनुस्वार, अङ्गीकार, वर्तुल, कारणात्मन्, द्वितीया, चक्ष्, रणशिरस्, प्रसक्ति, प्रतिव्यूह, सूत्र, वेणुविदल, मौक्य, अनुरोध, हिमवारि, भावयु, मधुत्व, ईश्, सुगत, दीर्घायुत्व, प्राज्ञमानिन्, रेष्टर्, अवमानना, आवह्, सावर्ण, गुरुगृह, कुलपांसनी, संवर्धन, विमति, खाद्य, तिरोऽह्न्य, धर्मशील, धीवन्त्, जीवक, जनितर्, प्रतिकूल, वितृण, सुवदना, उपजीव्, औदुम्बर, सुखश्रव, विश्रु, प्रमेय, कीर्ण, अभिरुध्, वेला, झण्, अपहन्, युवयोः, ऋषि, निदर्शिन्, गुडमय, अवलिप्, यज्ञहोतर्, रसिकजन, तपोवृद्ध, प्रसर्ग, प्रवन्त्, एकांश, नाभिमान, द्रविणाधिपति, अय, स्कुन्द्, सर्ज, संसद, ऋणवन्त्, मृतक, वीत, हक्क, आपस्तम्ब, अस्मान्, अपहा, धनलोभ, विपक्षीय, प्रेताधिप, संप्रिय, विदेव, शाव, लोहायस, श्ववाल, नदनुमन्त्, नृवन्त्, क्रेतर्, नखानखि, रथचक्र, विधूम, उपस्त्हान, शान्तरजस्




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