पा

पा
पा I /pā/ (P. pr. /pibati/ — I; fut. /pāsyati/; pf. /papau/; aor. /apāt/; p. /pīyate/; pp. /pita/; ger. /pītvā/; inf. /pātum/)
1) пить
2) всасывать
3) поглощать




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साति, , घट्, विषाणिन्, आसेक, प्रवर्धन, आपदय्, आसेव्, कुक्कुटी, शुष्क, सरसीज, ककुद्, विकाश, संशृ, विहायस्, हासिन्, प्रतिमन्त्रण, दुःकृत, राजगृह, प्रयाचन, तुविष्ठम, अङ्कस्, याचन, गोप्तर्, सुधामय, गोविन्द, हिमवत्सुता, स्त्रीजननी, °लोभिन्, षडह, व्रा, जारिणी, कृशनावन्त्, जीवन्त्, दाह्य, क्षुभ्, संपत्, स्फोट, स्वर्णकार, मृगवन, स्थिरयौवन, शौल्किक, प्रपञ्च, मकार, शत, अतिप्राकृत, दर्भण, प्रत्याश्वास, पितृयज्ञ, धर्मेन्द्र, समाभर्, घण्टापथ, पद्र, प्रघोष, दिगन्त, द्वादशार, यवन, अभिप्रपच्, गुरुगृह, व्यसि, प्रत्यावर्त्, यथाकामम्, ब्रह्मर्षि, दैवज्ञत्व, कबर, प्रत्यधिकरणम्, नीवार, स्फूर्ज्, °अन्तर, तृद्, प्रौढि, सप्तहोतर्, अजा, सुमधुर, निष्क्रम्, फणवन्त्, सिता, तृध, छुच्छुन्दर, मुर्च्छ्, विहीन, युगल, समांस, गाथिका, व्ययन, संभार, क्षुरकर्मन्, रोमोद्गम, यात्रिक, सुतर, कोल, अद्रव, कोप, आविद्, पृथिवी, तन्वङ्गी, हिति, आगन्तु, सानुक्रोशता, चित्रार्पित, तूण, प्रवेदन, मुधा, वनीवन्, कृतक, वेदविद्वस्, समुद्रवसन, कारना, नागरक, लौहित्य, लय, वाञ्छ्, अस्रिधान, राजसूनु, अत्रिन्, धनसनि, सयन, पल्लविन्, दूषि, सनायु, अक्षहृदय, वेक्षण, निरामय, दुःस्थ, सुमङ्गल, विस्फूर्जित, अधिकरण, अपक्रम, नृशंस, धर्मसमय, विसह्, अस्मासु, सुंभृत्य, हरिनेत्र, प्रहेला, कुशिक, स्वाकृति, अभिदीधि, भागीयंस्, परिश्रि, अल्पभुजान्तर, स्त्रीघातक, युग्म, नवेदस्, शिशिरकिरण, पेषण, निर्वेद, पृथक्कार्य, दण्डाधिपति, मूर, त्र्यक्षर, आशौच, कूची, समुदीरय्, विरावण, दृष्टश्रुत, चर्च्, मुखमारुत, श्रोणि, प्रैष्य, अतृप्त, कम्पवन्त्, सत्कार, परिधारण, सुषह, परासेध, सर्वमङ्गला, शिथिलसमाधि, नाट्यवेद, उत्सर्ग, हस्तिघात, त्वक्षस्, सौख्य, निद्रालु, साहसिकता, विजयनगर, ईश्वरत्व, सर्वनर, बट्, तदुपहित, दृशीकु, तरु, व्यन्तर, वंशगोप्तर्, कुलीर, खञ्ज्, मातामही, जतू, ससुहृद्, पुत्रपौत्रक, पृथुक, यष्टि, पारुष्य, अर्ध, अजन, शुक, मनुज, हार्दिन्, उत्थान, वामा, नियुज्, कुलतन्तु, श्लथ्, ब्रह्मद, आस्तरण, पौत्र, तैमिररोग




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