सपिण्ड

सपिण्ड
सपिण्ड /sapiṇḍa/ m. родственный до 3—6 колена




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ईर्, युग, शीतस्पर्श, शकृत्, दर्पण, सुधार, आत्मन्, ज्ञानेन्द्रिय, याज्ञिक, प्रत्यभिज्ञा, श्लथ, निवसति, विस्मृत, दुर्विपाक, उपावर्त्, एतदवस्थ, संचिति, नयन, तरुमण्डप, पुष्पपुर, अप्रतर्क्य, कृष्णसार, जिघत्सा, जीर, जिज्ञासु, भन्, उपलक्षण, हित, अनुविनश्, अहंकार, हेषित, हरितच्छद, दैव, क्षुप, उसर्, श्येन, शवसावन्त्, सरुच्, शिमी, ग्रन्थिमन्त्, जाम्बवती, पलाश, आगा, बृहद्द्युति, प्रयत्न, विमाथिन्, पराधीन, सपक्षत्व, प्रलयदहन, केसरिन्, निश्चक्षुस्, राहु, मतङ्ग, हव्यवाहन, निह्नुति, प्रियंकर, प्रयाग, अरिष्टि, नवाक्षर, रौही, कर्किन्, मालती, सुकण्ठ, विरह्, किरिक, वर्धिष्णु, सवन, अतिधृति, क्षीणत्व, अभिवर्ष्, शयथ, धारपूत, अर्हय्, मैत्र, वार्द्धक, प्रधान, दैवत, धर्मकृत्, वेविज, वसुधाधिप, स्तिप्, बाष्पकण्ठ, समद्, निर्विवाद, आदिदेव, अप्सरा, शरन्मेघ, विश्वामित्र, सुकुमार, ग्रैष्मिक, तृष्यावन्त्, लङ्का, अविद्य, सैकत, दूष्य, ऋश्यशृङ्ग, उपचर्, पठन, इन्दीवर, पक्षिन्, निदाघ, विद्वेषण, भद्रपाठ, त्रयःषष्टि, लुप्, त्रिनवति, वृक्षनिर्यास, शाल्, द्वैधीभाव, त्रिसंध्य, स्पश्, आश्लिष्, उत्कल्, सैनिक, दिक्पति, जायात्व, वाण, अदत्त, हृद्यगन्धा, मनस्वन्त्, सांयुगीन, परिपश्, जनेन्द्र, मेघजाल, वधजीविन्, पारस्कर, मित्रबल, प्राप्तप्रभाव, अनुवीक्ष्, हिमक्ष्माधर, गर्भवास, आत्मविद्, विनिर्जि, तद्विध्य, वाग्दुष्ट, शाश्वत, मेषी, त्र्यश्र, स्वर्गति, अजावि, शुष्कत्व, परिवर्, उद्वह, युगादि, मृक्ष, कुम्भिल, प्रतिश्रुति, पयस्वन्त्, उत्सर्ज्, संभा, रत्नवन्त्, सजूष्, आन्ध्र, कामान्ध, शतभुजि, परत्र, समनस्, नक्तचारिन्, मुखशशिन्, गोप, जिजीविषा, पत्नी, अतिबल, प्रत्युत्पन्न, चञ्चरिन्, अधःशायिता, शृध्या, शुभकर, क्षोदस्, कोरक, स्वर्गगामिन्, एक, मय, भावका, ताम्रपात्र, बहुधा, उपर, वैलक्षण्य, डमर, °मध्यवर्तिन्, ज्येष्ठतरा, व्यञ्जक, समाहरण, आत्मौपम्य, पङ्कवन्त्, संनर्द्, प्रवर्तनीय, पथ्य, प्रस्तव, गवांपति, प्रयोजय्, जातपक्ष, मद्र, छात्त्र, भग्नता, सुस्वाद, ऐन्द्रजाल, दिङ्मण्डल, नरेन्द्र, दर्भमय, मूढदृष्टि, भोक्तर्, मायावन्त्, म्लानि, दुःशील, आज्य, ढाल
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