विकर्तर्

विकर्तर्
विकर्तर् /vikartar/ m.
1) тот, кто переделывает или изменяет что-л.
2) оскорбитель; обидчик

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संप्रनश्, निःश्रीक, अष्टन्, विलोठिन्, सेतुबन्ध, सहवत्स, शमप्रधान, मामकी, गन्धक, क्षेपीयंस्, द्रवर, ब्रह्मविद्, निकृष्ट, तुन्दिल, निगारक, जनवाद, उपजनय्, सर्वाभाव, षड्विंशत्, मेधिर, गतप्राण, परिभविन्, उपकण्ठ, त्रेतायुग, संप्रधारण, यूका, रुक्मरथ, नना, वैपञ्चमिक, निरप, प्रख्या, दूरत्व, भूर्योजस्, जातु, सुतीक्ष्ण, आपद्गत, अभिमन्यु, विश्वस्, वैलक्षण्य, अरुष, नियतव्रत, उच्छ्रि, स्वञ्ज्, ईश्वरप्रणिधान, उपोह्, द्विक, नादित, काम्बोज, अनुयम्, ददि, निवेष्य, सर्वानवद्याङ्ग, दिग्विजय, सुसमिद्ध, वेविज, मृगाङ्गना, आहिंस्, शीत, दुष्प्रयुक्त, प्रतिष्ठित, द्वयु, कृति, निर्वास, क्षेत्रिक, तन्त्रकार, परतः, पीत, प्रतिनिवर्त्, पतिवत्नी, तानि, आत्मवध, समुत्थ, हीरक, राजमातर्, मूर्तिमन्त्, दिक्° , दिक्क°, जिहीर्षा, ज्रयस्, हिंस्रजन्तु, नाटकीया, मायूर, भृङ्गसार्थ, तपस्विकन्या, प्रशस्त, वृद्ध, मकार, ईक्ष्, अर्थतृष्णा, दुष्परिहन्तु, उपभोग, अमरोपम, अनुल्बण, गोचर्मन्, मेला, यजत, वरार्ह, अलक, आसुति, वनभू, स्वभाव, सगद्गद, समायुत, दुःस्थिति, लावण्य, प्रतिरुध्, पाणिपात्र, विहस्, नाकिनाथ, कपिञ्जल, विजिह्व, मूत, अत्या, पृषोदर, देववधू, सार्थ, षट्चरण, कृ, वार्त्ताहार, जम्बूद्वीप, गुङ्गु, जेन्य, ध्वंसक, प्रतिश्रय, पञ्चचत्वारिंशत्, गञ्जा, न्याय्य, तरि, सुनासिक, भण्ड, अवधा, गतजीव, खार, सशर, दुर्णामन्, संध्यापयोद, तोयधार, तपनीय, द्रङ्ग, समुद्धत, अनवाप्य, निराशता, अगोचर, छर्दिस्, कर्त्तर्, चित्रग, निरस्त्र, तीर्त्ह्य, द्विगु, संज्ञा, निःषेचन, जनिवन्त्, शाण्डिल्य, पुरंध्री, निर्व्यापार, खकार, अंह्रि, संलुड्, शर्य, हयन, शरीरक, निःसह, चाक्ष्म, दम्भ्, नविष्ठ, चतूरात्र, प्रचित, मन्द्र, आकल्पम्, तिर्यगायत, धरणी, रहण, संनाद, निद्, ब्रह्मज्ञान, दण्डपातन, पुरः, निगूहन, पुष्कल, आभु, प्रमदन, दम्°, वामनपुराण, चातक, पचेलिम, स्वाद्, नीलाभ, उत्पत्, निर्जीवकरण, हृदयस्थान, निर्ध्या, निरिङ्ग, गुणान्वित, धातुमय, प्रद्वार, निरंशक, पद्माक्ष, जन्मकृत्, अत्यायत, संवलन, संख्या, कुन्ती, द्रुग्ध, पौष्प, पह्लव, क्षेम, उद्गमनीय, रम्या







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