अभिव्याहर्

अभिव्याहर्
अभिव्याहर् /abhivyāhar/ (формы см. हर्) говорить, высказываться




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गुणग्राम, व्यसनिन्, प्रहृष्ट, अवश्यभाव, आस्फोट्य्, ग्लहन, सस्, त्सरुमन्त्, प्रमीतपतिका, ऐणेय, वैपुल्य, महापाप, वासतेय, वसुदान, अपि°, संलुभ्, नष्ट, मिमिक्षु, निराकाङ्क्षिन्, निमिष्, मीमांसक, यथापूर्व, परिपण, किरक, अलंकृति, सौव, शीतमरीचि, कार्य्कारणभाव, अन्धस्, शस्त्रवन्त्, व्रजिन्, महाघोर, पृथुश्रोणी, रजि, संप्रछ्, निरपत्य, यविष्ठ, आधूत, द्विजानि, दारण, देहय्, सुषिरता, संशीलन, हीन, °मृज, द्रवता, मङ्गल्य, उचितत्व, कात्यायन, प्रचि, मनुष्यजा, संसारार्णव, उदीक्ष्, स्वद्, न्रधीश, डिण्डिमा, वामेतर, पूरक, वलीमुख, उपकर्, मनय्, उड्डामर, कमठ, मन्दी भू, रजनिकर, कार्पासिका, विपणि, दुष्प्रवृत्ति, किंहेतु, श्रम्भ्, मुग्धता, महादेवी, मत्सरिन्, क्षिप्र, सश्रीकता, संवर्त्, तुर्वणि, चिकित्ता, अपरक्त, निस्त्रप, अच्युतच्युत्, प्रुषितप्सु, पर्युपस्था, धनिक, प्रसित, मत्, विपादय्, इन्द्रवज्रा, व्यवहर्तर्, निरालोक, दाण्डिक, धैनुक, वापिका, मित्रगुप्त, प्रमाणीकरण, प्रत्यागमन, ईर्ष्यु, योगवन्त्, भ्राज्, पूर्वतर, मनोहारिन्, दर्व, हित, राजवत्, , स्त्रीपुंधर्म, वाग्°, शूर्पणखा, नेदिष्ठ, शतदाय, मनोभव, प्रधर्षणा, देवयजन, सुमेरु, मोघी भू, निर्वहण, सुनासिक, चोषण, हुताश, प्रतिग्रह, खञ्जन, परिक्रिया, वीरासन, प्रलपित, स°, संवर्धन, जलविहंगम, केनिप, वृद्धयोषित्, गर्वित, कर्णिन्, नगनिम्नगा, विप्रकार, कथक, शोकावेश, शिवभक्त, यत्नतस्, शिखर, श्रीमन्त्, सवीर्य, बन्धुर, जलोद्भव, धर्मधृत्, दारक, हि, सेनापति, हिति, दीधिति, न्यस्, अनुगा, अन्तर्धि, विरक्त, आसञ्जन, छद, यूथ, बैन्द, अदृपित, प्रेति, द्वर, आयुष्काम, गोमत्, प्रवीण, हरिवन्त्, अभिसार, नौवाह, विलुड्, मेदिनी, क्रिमिज, प्राहारिक, नगाटन, दिनकर्तव्य, व्रतरुचि, निस्तमस्क, हर्षनाद, तिर्यग्ग, दुःखिन्, नित्यकृत्य, नृपतिकन्यका, उदासीन, कुशल, ताम्, मसि, सुनीति, अवस्तु, व्यधन, द्वंद्व, कवक, द्वैधीभाव, प्रत्यायन, काञ्चीकलाप, तालु, कियन्त्, समाया, मूक, अवरोह, अतिजगती, व्यञ्जन, एकतर, वादन, क्लोमन्, वैचित्त्य, गु, प्रस्निग्ध, संलभ्, नाकनायक, प्रतिपद्, ब्रह्मदेय




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