उपचि

उपचि
उपचि /upaci/ (формы см. चि ) накоплять; собирать




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खदा, आदित्यपुराण, परिचरण, विकास, पुरावृत्तकथा, दार्श, भीमनाद, उदारत्व, निपुणता, प्रत्युज्जीवन, राजधानी, बर्ह्, वासवदिश्, अभिविज्ञा, असाधुवृत्त, हेड्, त्रस्नु, विध्वंस, पद्मासन, रघुष्यद्, चर्मकार, सत्रा, विद्वेष, निरातपा, द्यूतधर्म, घनकाल, सहस्रचक्षुस्, आप्लु, कृतक्षण, परिशी, विधुत, पारक्य, कथित, तात, विष्ठित, वृद्धसृगाल, केतन, सुषखि, सहाध्ययन, ब्रह्मोद्य, भारवि, उरूची, स्थायित्व, पक्षिन्, धूनन, धर्मवादिन्, छेदनीय, परिणम्, अपोदि, संतोष, स्वस्तिदा, सर्वहुत, तूर्ण, दर्भस्तम्ब, धौरेयक, गर्वित, पराजि, हारिद्रक, एतदर्थम्, अगर्हित, ताम्रक, ईर्ष्या, प्रेक्षागृह, सप्तन्, सविश्रम्भ, नैरर्थ्य, अश्वावन्त्, निर्जीवकरण, उपलम्भ, यक्ष, अनुगम, द्विशफ, नस्त, वसुंधारा, अञ्जलि, पर्यालोचय्, आस्राव, कुण्ठ, मन्दार, छिद्र, द्वारपति, वीडु, भृमि, वर्धन, क्रमशस्, परिपूरक, विनिकर्, स्तुप, दृश्, उच्चैःकुल, सुधातु, द्विशिख, दिग्भाग, श्याव, तुरग, दानपरता, वित्तहीन, सहस्रवल्श, यदु, उक्षन्, रज्जुमय, पिष्ट, वयो°, मानापमान, सुधा, दूषि, प्राधानिक, देवकार्य, पौर्वदेहिक, संमर्शन, मच्छ, वचन, शृङ्गवन्त्, पिशङ्ग, वाद, उकिहिन्, पौरजानपद, छुच्छुन्दर, भर्त्सित, द्रु, विस्फर्, पद्मवर्ण, उपरति, उद्योगिन्, धीर, वेण, चैत्र, पारलोक, अजीर्ण, शल्य, सागरगा, उत्कण्ठित, यथेच्छ, यातव्य, स्यन्दिन्, अभिवाद, व्यञ्जन, वधत्र, पुररक्ष, बन्धय्, प्रतिभुज्, जिन्व्, गोमिन्, गत, विराम, सघन्, विलभ्, विराट, वृषण्य, समर्यन्त्, सर्वार्थ, रुह्, पूर्व-पेय, राजसुता, लिखन, ज्वालिन्, सविनय, परिभव, धनहीन, व्रश्च्, मद्विध, महोत्सव, पनु, कषण, अङ्गार, सेर्ष्य, प्रसाधक, द्वार्य, निसर्ग, नव°, राक्षसभाव, असुतृप्, गिरिनदी, अवाप्, शोचिष्ठ, पयोद, त्रिषत्य, निर्वापण, त्रयोदशन्, प्रतिपद्, कितव, आसुति, संपादयितर्, दीनार, वात, निरयण, पुत्राचार्य, अह्, उपवीत, सुभद्रा, पुष्पशेखर, मतिपूर्व, गणन, चापवेद, पलायन, सधी, मार्गस्थ, गभस्तिमन्त्, लाक्षा, °मुखीय, सर्वतोभद्र, प्रभवितर्, पवित्रिन्, गम्य, चल, जलविहंगम, वल्मीक




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